आरके अर्थ रिसोर्सेज की सूची ने खोला राजनैतिक ब्लैकमेलिंग का खेल: 100% स्थानीय युवाओं को रोजगार, फिर भी स्वार्थ के लिए ऊर्जांचल को संकट में डालने की साजिश

0

 

रोजगार पर झूठा हो-हल्ला

ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल उजागर

शत-प्रतिशत स्थानीय युवा कार्यरत

राजनैतिक रोटियां सेकने की कोशिश

सीधे खातों में जा रहा पैसा

(शहडोल से शुभम तिवारी)

शहडोल । ऊर्जांचल और औद्योगिक हब के रूप में पहचान रखने वाले सोहागपुर-शहडोल क्षेत्र में विकास की गति को रोकने और अपनी राजनैतिक जमीन तैयार करने का एक बेहद खतरनाक खेल खेला जा रहा है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में सक्रिय कतिपय तत्वों और तथाकथित राजनेताओं द्वारा लगातार यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि स्थानीय उपक्रमों में बाहरी लोगों को तरजीह दी जा रही है। इस झूठे नैरेटिव को आधार बनाकर आए दिन चक्काजाम, प्रदर्शन और काम बंद कराने की धमकियां दी जा रही थीं। लेकिन आरके अर्थ रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (शारदा ओसीएम सोहागपुर) की 100 कर्मचारियों की प्रामाणिक सूची सामने आने के बाद इस पूरे विवाद का ‘राजनैतिक सच’ बेनकाब हो गया है।

वास्तविकता यह है कि इस सूची में शामिल 100 फीसदी लोग स्थानीय (लोकल) हैं, जो इसी माटी में जन्मे हैं और यहीं के मूल निवासी हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब रोजगार पाने वाले सभी लोग स्थानीय हैं, तो फिर यह हो-हल्ला और विवाद किस लिए? अंदरूनी छानबीन में यह बात साफ हो चुकी है कि यह पूरा विवाद किसी मजदूर के हक के लिए नहीं, बल्कि राजनैतिक ब्लैकमेलिंग, नेगोशिएशन (सौदेबाजी) और क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए खड़ा किया जा रहा है। कुछ नेता इस डर से ग्रसित हैं कि कोई दूसरा उनसे बड़ा न हो जाए या उनका राजनैतिक कद छोटा न रह जाए। इसी वर्चस्व की लड़ाई के चक्कर में समूचे क्षेत्र के विकास और देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र को दांव पर लगा दिया गया है।

देखिए ….स्थानीय 100 कर्मचारियों को,

जो दे रहे सेवाएँ

दलाली प्रथा पर लगा पूर्ण विराम

औद्योगिक क्षेत्रों में यह पुरानी परिपाटी रही है कि बिचौलिये और दलाल मजदूरों के हक का पैसा खा जाते थे। लेकिन इस बार व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है। सूची के बारीक अवलोकन से साफ है कि किसी भी पुराने दलाल या बिचौलिए को इस पूरी प्रक्रिया में फटकने भी नहीं दिया गया है। हर एक मजदूर से लेकर कुशल मैकेनिक तक, सभी कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। जब दलाली के सारे रास्ते बंद हो गए और सीधे नेगोशिएशन की गुंजाइश नहीं बची, तो दबाव बनाने के लिए ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का यह फर्जी कार्ड खेला गया, जो अब पूरी तरह फ्लॉप साबित हो चुका है।

ऊर्जा क्षेत्र पर मंडराता बड़ा संकट

कोयला और ऊर्जा क्षेत्र किसी भी देश की रीढ़ होते हैं। सोहागपुर और शारदा ओसीएम जैसे खदान क्षेत्रों से निकलने वाला कोयला देश के बिजली घरों को रोशन करता है। जब अपनी व्यक्तिगत राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं और ब्लैकमेलिंग के चलते इन खदानों में काम व्यवस्थित करने के बजाय उसे बाधित किया जाता है, तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। उत्पादन ठप होने से न केवल कंपनी को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो जाता है। सबसे बड़ा संकट तो उन 100 स्थानीय परिवारों पर आता है, जिनकी रोजी-रोटी सीधे तौर पर इस काम से जुड़ी हुई है। अपनी राजनीति चमकाने वाले नेता तो एयरकंडीशंड कमरों में बैठ जाते हैं, लेकिन भुगतना इन स्थानीय मजदूरों को पड़ता है।

किसने कितनी सिफारिशें कीं: देखें आंकड़ों का पूरा गणित

यह सूची इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, यूनियनों और संस्थाओं की अनुशंसा पर ही इन युवाओं को रोजगार मिला है। प्रबंधन ने स्थानीय स्तर पर संतुलन बनाने के लिए सभी पक्षों को यथोचित प्रतिनिधित्व दिया है।

 

हर वर्ग का समावेश: मजदूर से लेकर कुशल कर्मी

इस सूची का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग और हर स्तर के हुनर को काम मिला है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ बड़े पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। इसमें भारी मशीनें चलाने वाले कुशल ऑपरेटरों से लेकर खदान की सुरक्षा और व्यवस्था संभालने वाले अकुशल ग्राउंड मैन तक शामिल हैं।

कुशल व तकनीकी पद: ऑपरेटर, सुपरवाइजर, सर्वेक्षक, ओवरमैन, इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर।

अर्ध-कुशल व सहयोगी पद: टिपर ड्राइवर, पंप फिटर, वेल्डर हेल्पर, स्टोर कीपर, डंप मैन।

श्रमिक वर्ग: माइनिंग हेल्पर, ब्लास्टिंग मजदूर, पंप हेल्पर और हाई वेल ग्राउंड मैन।

 

 

जनता समझे असली खेल

आरके अर्थ रिसोर्सेज की इस सूची ने न केवल दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है, बल्कि उन राजनैतिक चेहरों को भी बेनकाब कर दिया है जो खुद को ‘स्थानीय हितों का रक्षक’ बताते हैं। जब व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है, स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार काम मिला है और दलाली को दरकिनार कर पैसा सीधे खातों में जा रहा है, तो फिर इस प्रकार का कृत्रिम विवाद पैदा करना इस बात की गवाही देता है कि कुछ संगठन और नेता केवल नेगोशिएशन (सौदेबाजी) के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। यदि समय रहते जनता और प्रशासन ने इन तत्वों की असलियत को नहीं समझा, तो यह केवल किसी कंपनी का नुकसान नहीं होगा, बल्कि पूरे शहडोल संभाग की आर्थिक प्रगति और औद्योगिक शांति हमेशा के लिए ठप हो जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed