एक नाम नहीं, विश्वास थे पं. सत्येंद्र पाठक सेवा और समर्पण को नमन करता जनसागर पुण्यतिथि पर आयोजित भंडारे में उमड़ा जनसैलाब भावनाओं के साथ सभी नें दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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एक नाम नहीं, विश्वास थे पं. सत्येंद्र पाठक
सेवा और समर्पण को नमन करता जनसागर
पुण्यतिथि पर आयोजित भंडारे में उमड़ा जनसैलाब
भावनाओं के साथ सभी नें दी भावभीनी श्रद्धांजलि
कटनी।। मानव सेवा, त्याग और समर्पण की जीवंत मिसाल, मध्यप्रदेश शासन के पूर्व केबिनेट मंत्री स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र पाठक जी की पुण्यतिथि 28 अप्रैल को श्रद्धा, भक्ति और भावनात्मक वातावरण में अत्यंत गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुई। इस अवसर पर पूरा क्षेत्र मानो स्मृतियों में डूब गया, जहां हर दिल में उनकी छवि और उनके कार्यों की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। जैसे ही श्रद्धासुमन अर्पित हुए, वातावरण भावुक हो उठा मानो हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी न किसी पल को याद कर रहा हो, जहां स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र पाठक जी ने किसी न किसी रूप में उसका साथ दिया था।


पंडित सत्येंद्र पाठक का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे जन-जन के सच्चे हितैषी, जरूरतमंदों के सहारा और समाज के हर वर्ग के लिए आशा की किरण थे। उन्होंने निस्वार्थ भाव से सेवा करते हुए न केवल विकास के नए आयाम स्थापित किए, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में खुशियों का उजाला भी फैलाया।
पुण्यतिथि के अवसर पर कटाए घाट मोड़ स्थित सायना किड्स एवं आर के मोटर्स परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर व्यक्ति प्रसाद ग्रहण करते हुए भावविभोर नजर आया, मानो यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं बल्कि ‘बाबू जी’ के प्रति सच्ची आस्था और प्रेम का प्रतीक हो।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने उनके जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों को साझा करते हुए कहा कि ‘बाबू जी’ ने हमेशा लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनकर सेवा का जो मार्ग दिखाया, वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने सिखाया कि नेतृत्व केवल पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अपनत्व का नाम है। परिवार और संस्कारों की मजबूत विरासत
राजनीति के साथ-साथ उन्होंने अपने पारिवारिक दायित्वों को भी आदर्श रूप में निभाया। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला पाठक जी ने हर परिस्थिति में उनका साथ देकर परिवार को संस्कारों की मजबूत नींव दी।
उनके जीवन मूल्यों और आदर्शों की विरासत आज उनके सुपुत्र संजय पाठक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, जो क्षेत्र की जनता के बीच उसी अपनत्व और सेवा भाव से जुड़े हुए हैं।

उनकी पुण्यतिथि पर नगर सहित पूरा क्षेत्र भावविभोर है। हर व्यक्ति अपने अनुभवों, अपनी यादों और अपने शब्दों के माध्यम से उन्हें नमन कर रहा है। वो भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संस्कार और उनकी सेवा की भावना आज भी हर दिल में जीवित है। इस अवसर पर आशीष पाठक, यश पाठक, मनीष पाठक, राकेश गौतम, दीपक जैन, गुड्डा जैन, अनुज तिवारी, निक्कू सलूजा, राजेन्द्र दुबे(पप्पू पुलिस), रामजी पांडे, वरुण गौतम, अमन पाठक, रिजुल भसीन, सृजन सलूजा, सचिन तिवारी, सुमित अजमानी, नीरज नगरिया, राजू शर्मा, ध्रुव महेश्वरी, ऋषि अरोड़ा, अर्जुन तिवारी, प्रियंक अग्रवाल, लालू जैन, राजा सलूजा, मनीष लालवानी, रवि मिश्रा,अंकित अग्निहोत्री, कपिल भाटिया, राजू तनवानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं मित्रमंडल के सदस्य उपस्थित रहे।

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