सचिव किसन राठौर फर्जी सरपंच बनकर शासन की 17 लाख की राशि डकार गया सत्ता की धौंस और भ्रष्टाचार का ‘चोली-दामन’ का साथ जीवंत दर्शन 

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रसूखदार सचिव किसन राठौर के काले कारनामों की खुली पोल

 

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही: जिले में एक ग्राम पंचायत सचिव के भ्रष्टाचार और उसके राजनीतिक रसूख का एक बड़ा मामला सामने आया है। खुद को आरएसएस (RSS) और भाजपा का बड़ा नेता बताने वाले सचिव किसन राठौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि यह सचिव अपनी राजनीतिक धौंस दिखाकर लगातार भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा है और नियम-कानूनों को ताक पर रखकर शासकीय राशि का गबन कर रहा है।

 

हाल ही में हुए खुलासों और आधिकारिक दस्तावेजों ने इस रसूखदार सचिव के दावों और कार्यों की पोल खोल दी है।

 

दस्तावेज ने खोली 17 लाख के घोटाले की पोल:

भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि हाल ही में जारी किए गए एक आधिकारिक नोटिस से होती है। कार्यालय जिला पंचायत, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही द्वारा दिनांक 18 मई 2026 को सचिव किसन राठौर (वर्तमान सचिव, ग्राम पंचायत तरईगांव) को एक ‘कारण बताओ सूचना’ पत्र (क्रमांक 483/जि.पं./स्था./2026-27) जारी किया गया है।

 

इस नोटिस में पीपरखुंटी ग्राम पंचायत में हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है:

वित्तीय अनियमितता: वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त आयोग की राशि 17,26,600/- (सत्रह लाख छब्बीस हजार छह सौ रुपये) का अनियमित आहरण एवं भुगतान किया गया है।

 

कदाचार: सचिव पद पर रहते हुए किसन राठौर ने सरपंच के अधिकारों का दुरुपयोग किया और अपने डी.एस.सी. (DSC) का गलत इस्तेमाल कर वेंडरों को अवैध रूप से भुगतान किया।

 

कार्रवाई की चेतावनी: जिला पंचायत सीईओ ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और आपराधिक कृत्य मानते हुए शासकीय राशि के दुरुपयोग का प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। उन्हें 3 दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

 

‘हाल ए हलचल’ ने किए दो और बड़े खुलासे:

पीपरखुंटी पंचायत के अलावा, किशन राठौर के अधिकार क्षेत्र वाली दो अन्य पंचायतों में भी भारी धांधली उजागर हुई है।

 

हाल ही में ‘हाल ए हलचल’ ने इनकी पोल पट्टी खोली है:

ग्राम पंचायत सेमरा (मनरेगा में धांधली): मनरेगा योजना, जिसका मूल उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना है, वहां नियमों को धता बताते हुए तालाब गहरीकरण के कार्य में मजदूरों की जगह जेसीबी (JCB) मशीन का उपयोग खुलेआम किया जा रहा था।

 

ग्राम पंचायत तराई गांव (15वें वित्त की राशि में हेरफेर): यहां 15वें वित्त की राशि से निर्माणाधीन नाली के कार्य में भारी अनियमितता बरती जा रही है और गुणवत्ता से सरेआम समझौता किया जा रहा है।

 

दोषी होने पर भी ‘बाल न बांका’ होने का राज:

स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि किसन राठौर पर पहले भी कई मामले दर्ज हुए हैं और वह दोषी भी साबित हो चुके हैं।

 

बावजूद इसके, आज तक उन्हें नौकरी से बर्खास्त नहीं किया गया। दंडात्मक कार्रवाई के नाम पर केवल उन्हें ‘ऑफिस अटैच’ करके खानापूर्ति कर दी जाती है।

 

इस अभयदान के पीछे उनका ‘राजनीतिक रसूख’ बताया जाता है। आरोप हैं कि:

 

वह आरएसएस और सत्ताधारी दल के नेताओं से अपनी करीबी का फायदा उठाते हैं।

 

शासकीय सेवक होने के बावजूद भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में मंच साझा करते हैं।

 

पंचायत सचिव के पद पर रहते हुए स्वयं ‘ठेकेदारी’ का काम भी करते हैं।

 

जब भी कोई जांच बैठती है, तो वे कथित तौर पर उच्च अधिकारियों और जांच अधिकारियों को अपने प्रभाव या पैसे के दम पर खरीद लेते हैं, या फिर नेताओं से दबाव बनवाकर मामले को रफा-दफा करवा देते हैं।

 

अब सवाल यह उठता है: 17 लाख रुपये से अधिक के गबन के पुख्ता प्रमाण और जिला पंचायत से नोटिस जारी होने के बाद, क्या प्रशासन इस ‘रसूखदार’ सचिव पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई (बर्खास्तगी या FIR) करेगा?

 

या फिर एक बार फिर से राजनीतिक दबाव में मामले को ‘ऑफिस अटैचमेंट’ की फाइल में दबा दिया जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

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