दो बंदी, एक प्रहरी और गंभीर आरोप…सच्चाई क्या है कटनी जिला जेल में एक ही प्रहरी पर दो विचाराधीन बंदियों ने लगाए मारपीट, प्रताड़ना और पैसों की मांग के आरोप दोनों मामले न्यायालय में विचाराधीन, दोनों परिवारों ने ली न्यायालय की शरण; जेल प्रशासन बोला- सभी आरोप निराधार
दो बंदी, एक प्रहरी और गंभीर आरोप…सच्चाई क्या है
कटनी जिला जेल में एक ही प्रहरी पर दो विचाराधीन बंदियों ने लगाए मारपीट, प्रताड़ना और पैसों की मांग के आरोप
दोनों मामले न्यायालय में विचाराधीन, दोनों परिवारों ने ली न्यायालय की शरण; जेल प्रशासन बोला- सभी आरोप निराधार
जेल की ऊंची दीवारों के भीतर आखिर क्या हो रहा है क्या यह महज संयोग है कि अलग-अलग मामलों में बंद दो विचाराधीन बंदियों ने लगभग एक जैसे आरोप लगाए हैं या फिर इन आरोपों के पीछे कोई ऐसी सच्चाई छिपी है, जिसे सामने लाने की जरूरत है? फिलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं, लेकिन पूरा घटनाक्रम कई गंभीर प्रश्न जरूर खड़े कर रहा है।
कटनी।। जिला जेल कटनी एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा के केंद्र में आ गई है। हैरत की बात यह है कि अलग-अलग मामलों में बंद दो विचाराधीन कैदियों ने जेल में पदस्थ एक ही प्रहरी पर मारपीट, प्रताड़ना और पैसों की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि जेल प्रशासन ने दोनों मामलों को पूरी तरह तथ्यहीन बताते हुए आरोपों को खारिज कर दिया है, लेकिन एक ही कर्मचारी के खिलाफ लगातार सामने आ रही शिकायतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ताजा मामला मणप्पुरम गोल्ड लोन डकैती प्रकरण में जेल में निरुद्ध विचाराधीन बंदी गोलू राय का है। न्यायालय के आदेश पर चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लाए गए गोलू राय ने पत्रकारों के समक्ष आरोप लगाया कि जेल में पदस्थ प्रधान प्रहरी राजभान दुबे ने उससे 20 हजार रुपये की मांग की थी और मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ मारपीट की गई। बंदी ने यह भी दावा किया कि अस्पताल में उसका पक्ष खुलकर सामने नहीं आने दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इससे पहले भी आया था एक पत्र
गोलू राय का मामला सामने आने से कुछ दिन पूर्व हत्या के एक मामले में जेल में बंद विचाराधीन कैदी मोहित धामेचा का एक पत्र भी चर्चा में आया था। उसके परिजनों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि वरिष्ठ प्रहरी राजभान दुबे द्वारा उनके पुत्र के साथ मारपीट की जा रही है और उसे जेल के अंदर खत्म करवा देने तक की धमकियां दी जा रही हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि प्रहरी द्वारा पैसों की मांग की जाती है तथा पैसा न देने पर प्रताड़ित किया जाता है। बंदी की मां पूजा धामेचा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पुत्र ने पूर्व में एक मामले में न्यायालय में गवाही दी थी, जिसके कारण उसे निशाना बनाया जा रहा है।

आरोपों में कई गंभीर दावे
शिकायती पत्र में जेल के भीतर सुविधाओं के बदले कथित लेन-देन, कुछ बंदियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा जेल कर्मियों के प्रभावशाली संरक्षण जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन दावों की किसी सक्षम एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
बड़ा सवाल : आखिर बार-बार एक ही नाम क्यों
दो अलग-अलग मामलों में बंद दो विचाराधीन कैदियों द्वारा एक ही प्रहरी पर लगभग समान प्रकृति के आरोप लगाए जाना अपने आप में कई प्रश्न खड़े करता है। क्या यह महज संयोग है क्या बंदियों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के पीछे कोई अन्य कारण है?या फिर वास्तव में जेल के भीतर कुछ ऐसा चल रहा है जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा अवश्य शुरू कर दी है।
न्यायालय तक पहुंच चुके हैं दोनों मामले, इसलिए बढ़ गई है गंभीरता
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन दो मामलों में जिला जेल के एक ही प्रहरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वे दोनों मामले अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्यायालय के संज्ञान तक पहुंच चुके हैं।
मणप्पुरम गोल्ड लोन डकैती प्रकरण में विचाराधीन बंदी गोलू राय के मामले में न्यायालय द्वारा चिकित्सकीय परीक्षण के आदेश दिए गए, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया था। वहीं हत्या के मामले में विचाराधीन बंदी मोहित धामेचा के परिजनों ने भी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित न्यायालय की शरण लेते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई है। यही कारण है कि इन दोनों मामलों को सामान्य आरोप-प्रत्यारोप की तरह नहीं देखा जा रहा है। एक ही प्रहरी के खिलाफ दो अलग-अलग विचाराधीन बंदियों और उनके परिवारों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाना तथा दोनों मामलों का न्यायालय तक पहुंच जाना पूरे प्रकरण को और अधिक संवेदनशील बना देता है।
हालांकि जिला जेल प्रशासन लगातार सभी आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बता रहा है, लेकिन अब यह मामला केवल बंदियों और जेल प्रशासन के बीच का विवाद नहीं रह गया है। चूंकि दोनों प्रकरण न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं, इसलिए पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

जेल अधीक्षक ने खारिज किए आरोप
जिला जेल अधीक्षक प्रभात चतुर्वेदी ने दोनों मामलों में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि गोलू राय द्वारा जेल कर्मियों के साथ लगातार अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की जा रही थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक और सीमित बल प्रयोग किया गया था, जिसकी जानकारी न्यायालय को भी दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मारपीट और पैसों की मांग जैसे आरोप तथ्यहीन हैं।
मोहित धामेचा प्रकरण पर भी जेल अधीक्षक ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के पास पैसों के लेन-देन या प्रताड़ना के प्रमाण हैं तो उन्हें प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल दोनों मामलों में आरोप और प्रत्यारोप आमने-सामने हैं। एक ओर दो विचाराधीन बंदी और उनके परिजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जेल प्रशासन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि आरोप निराधार हैं तो लगातार एक ही कर्मचारी का नाम शिकायतों में क्यों सामने आ रहा है और यदि आरोपों में सच्चाई है तो फिर जेल के भीतर क्या चल रहा है इन सवालों का जवाब अब निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही सामने आ सकेगा। कटनी जिला जेल से सामने आए घटनाक्रम ने एक बार फिर उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो कानून के संरक्षण और सुधार की जिम्मेदारी निभाती है। अब निगाहें प्रशासन की संभावित जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।
एक ओर हत्या के मामले में बंद विचाराधीन कैदी मोहित धामेचा और उसके परिजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर मणप्पुरम डकैती प्रकरण का आरोपी गोलू राय भी लगभग उसी प्रकार के आरोप लगा रहा है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि आखिर लगातार एक ही कर्मचारी का नाम शिकायतों में क्यों सामने आ रहा है।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं…
■ एक ही प्रहरी पर लगातार आरोप क्यों लग रहे हैं।
■ क्या शिकायतों की स्वतंत्र जांच होगी।
■ क्या बंदियों की शिकायतों का कोई रिकॉर्ड मौजूद है।
■ यदि आरोप झूठे हैं तो बार-बार एक जैसे आरोप क्यों।
■ यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी किसकी होगी।