थाने से ठुकराई गई बेवा, रास्ते में दबंगों ने घेरा: न्याय मांगने निकली महिला बोली—अब जाएं तो जाएं कहां?

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(शुभम तिवारी….+918770354184)

अमलाई । थाना क्षेत्र में एक बेवा महिला की फरियाद सुनने के बजाय उसे बिना कार्रवाई लौटाए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि मोहल्ले का एक युवक लंबे समय से उस पर गंदी नजर रखता है, रास्ते में छेड़खानी करता है और विरोध करने पर धमकियां देता है। शनिवार को महिला अपने देवर और छोटी बच्ची के साथ न्याय की आस लेकर अमलाई थाने पहुंची, लेकिन वहां से उसे निराश होकर लौटना पड़ा।

पीड़िता के अनुसार उसके पति का निधन काफी पहले हो चुका है। वह मजदूरी कर किसी तरह अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही है। महिला ने आरोप लगाया कि मोहल्ले में रहने वाला मकबूल नामक युवक काफी समय से उसे परेशान कर रहा था। कुछ दिन पहले जब वह घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी, तभी आरोपी वहां पहुंचा और गलत नीयत से उसे छूकर निकल गया। लोकलाज के कारण महिला उस समय चुप रही, लेकिन जब ऐसी घटनाएं लगातार होने लगीं तो उसने परिवार को पूरी बात बताई।

इसके बाद शनिवार को महिला अपने देवर के साथ अमलाई थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना बताई। आरोप है कि पुलिस ने उसकी बात तो सुनी, लेकिन न एफआईआर दर्ज की और न ही कोई प्रारंभिक कार्रवाई की। घंटों इंतजार के बाद महिला को बैरंग वापस लौटना पड़ा।

मामला यहीं नहीं थमा। पीड़िता का कहना है कि जब वह थाने से लौट रही थी, तभी स्टेट बैंक के पास आरोपी युवक अपने तीन-चार साथियों के साथ पहुंच गया। महिला का आरोप है कि उसे रास्ते में रोककर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और अंजाम भुगतने की धमकी दी गई। इस दौरान महिला ने एक वीडियो बयान भी जारी किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

महिला ने कहा, “जब थाने में सुनवाई नहीं हुई और बाहर दबंग रास्ता रोक रहे हैं, तो अब मैं न्याय के लिए कहां जाऊं?” पीड़िता ने साफ कहा है कि यदि उसके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी आरोपी युवक और उसके साथियों की होगी।

इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक असहाय महिला मदद मांगने थाने पहुंचे और उसे संरक्षण देने के बजाय खाली हाथ लौटा दिया जाए, तो आम नागरिकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

महिला अब पुलिस अधीक्षक से मिलकर शिकायत करने की तैयारी में है। इलाके में चर्चा है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब एक पीड़ित महिला को थाने में न्याय नहीं मिलता, तो वह आखिर जाए तो जाए कहां?

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