द्वेष भावना से प्रेरित होकर एफआईआर में कराया फर्जी नाम दर्ज

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बेगुनाह भी बन रहे गुनहगार
घटना स्थल पर नही रहे मौजूद फिर भी लग गये कई आपराधिक धाराएं
11 जून को वार्ड नंबर-9 में रात्रि लभभग 8:30 बजे राठौर परिवार में विवाद शुरू होता है, घटना के बाद दोनो पक्ष कोतवाली पहुंचते है और दोनो के विरूद्व एफआईआर दर्ज की जाती है, लेकिन एक पक्ष ने द्वतीय पक्ष के दोस्तो का ऐसा नाम लिखवाया जो घटना स्थल व जिनका इस झगडे से दूर-दूर तक नाता नही था, अब बेगुनाही साबित करने के लिए दर-दर भटक रहे है।
अनूपपुर। कोतवाली अंतर्गत वार्ड नंबर-09 में निवास करने वाले विवेक व सीताराम राठौर का विवाद उनके भतीजे ज्ञानेन्द्र राठौर के साथ वर्षो से चला आ रहा है, जो कि एक ही पट्टे में दोनो का मालिकाना हक है, वर्तमान में तहसीलदार न्यायालय में बटनवारा का मामला लंबित है। उक्त जगह में ईट का प्लांट व मकान के साथ शेष भूमि भी है, जहां ज्ञानेन्द्र व्यवसाय का संचालन कर रहा था, लेकिन पारिवारिक मालिकाना हक को लेकर दोनो पक्षों में विवाद उत्पन्न होता है, जो वर्षो से कई चरणों इनका झगडा चला आ रहा है, न तो झगडे कम हुए और न ही किसी भी तरह का निराकरण व समझौता दोनो के बीच हो पाया, बीते महीनों में सीताराम राठौर व विवेक राठौर के द्वारा महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई थी।
11 जून को फिर हुआ विवाद
रात्रि लगभग 8 बजे ज्ञानेन्द्र राठौर अपने कुछ दोस्तो के साथ ईट का प्लांट गया था, जहां कुछ ही देर बाद भाई विवेक राठौर व ज्ञानेन्द्र राठौर के बीच गहमा-गहमी होते हुए मारपीट की शुरूआत हो गई, विवेक राठौर के द्वारा धारदार हथियार से ज्ञानेन्द्र पर वार करने लगा इसी बीच ज्ञानेन्द्र के दोस्तों ने बीच-बचाव कर कर उसे कोतवाली लाया गया जहां पुलिस के समक्ष इस घटना को बताया गया, जिस पर एफआईआर पुलिस ने दर्ज कर मामले की विवेचना कर रही है।
बनाया बेगुनाहों को गुहनगार
उक्त घटना कारित होने के बाद विवेक राठौर कोतवाली पहुंचता है और ज्ञानेन्द्र के साथ घटना स्थल पर मौजूद दोस्तो का नाम भी एफआईआर में दर्ज करवा देता है, लेकिन इस घटना से जिसका दूर-दूर तक लेना-देना नही था, उसका भी नाम षडयंत्र के तहत् दर्ज करवा दिया। जबकि घटना के वक्त पियूष पटेल व पवन पटेल मौजूद ही नही थे, वही कोतवाली से विवेक राठौर ने अपने फेसबुक एकांउट से लाईव चलाकर रंजिशन पियूष पटेल के साथ अन्य का नाम भी लिया था और पुलिस पर कार्यवाही न करने का आरोप भी लगा रहा था।
सीसीटीवी से सच आयेगा सामने
11 जून की रात्रि जब घटना कारित हो रहा था और विवेक राठौर के द्वारा जिनका नाम लिया जा रहा था, उनमें से पियूष पटेल, जीतेन्द्र सोनी, पवन पटेल के साथ अन्य का नाम भी लाईव चलाया था, लेकिन उस वक्त जीतेन्द्र सोनी भोपाल में थे, पियूष पटेल सनबीम स्कूल के सामने कार्यालय में बैठे हुए थे, जिनका सीसीटीवी फुटेज में बाकायदा प्रमाण दिखाई दे रहा है, वही पवन पटेल भी किसी रेस्टोरेंज में मौजूद थे, उसके बावजूद भी एफआईआर में जीतेन्द्र को छोडकर दो नाम दर्ज करा दिया गया।
लोकेशन से भी चलेगा पता
कोतवाली पुलिस के द्वारा अगर निष्पक्ष जांच की जाती है तो निश्चित तौर पर सच सामने आ ही जायेगा, जिनका नाम गलत तरीके से दर्ज कराया गया है, उनका मोबाइल लोकेशन भी सर्च किया जा सकता है और ऐसे बेगुनाहों के नाम पर एफआईआर दर्ज करवाने वाले पर कार्यवाही भी की जा सकती है। द्वेष भावना रखकर विवेक राठौर व सीताराम राठौर के द्वारा ज्ञानेन्द्र के सभी दोस्तो का नाम लिखवा दिया है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है, ऐसे में बेगुनाह भी गुनहगार बनकर कोतवाली व न्यायालय का चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है।

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