पेड़ से टक्कर या पीछे से बाइक की भिड़ंत? FIR ने खड़े किए कई बड़े सवाल, जांच की दिशा पर उठे सवाल।
गौरेला। गोकुल प्रसाद की सड़क दुर्घटना में हुई मौत का मामला अब साधारण हादसा नहीं रह गया है। पुलिस द्वारा दर्ज FIR और घटनास्थल से जुड़े बताए जा रहे प्रत्यक्ष तथ्यों के बीच अंतर को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
FIR क्रमांक 0377/2026, थाना गौरेला में दर्ज मामले के अनुसार मृतक गोकुल प्रसाद 2 मार्च 2026 को सुबह करीब 8 बजे मोटरसाइकिल से गोरखपुर से पीपरखुंटी की ओर जा रहा था। FIR में पुलिस ने उल्लेख किया है कि पीछे से आ रही मोटरसाइकिल क्रमांक CG10BF8922 के चालक द्वारा तेज एवं उपेक्षापूर्वक वाहन चलाकर दुर्घटना की गई, जिसके बाद उपचार के दौरान सिम्स अस्पताल बिलासपुर में उसकी मृत्यु हुई।
लेकिन घटनास्थल की कहानी पर सवाल क्यों?
मामले से जुड़े लोगों की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि मृतक की बाइक पेड़ से टकराई थी और घटनास्थल पर मृतक के वाहन के अलावा दूसरी बाइक मौजूद नहीं थी। यह भी दावा है कि मौके पर पहुंची 112 की पुलिस टीम ने भी दूसरी बाइक को घटनास्थल पर नहीं पाया।
यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि दूसरे वाहन को दुर्घटना से जोड़ने का ठोस आधार क्या था?
दूसरी ओर, FIR में पुलिस ने पीछे से आ रही बाइक CG10BF8922 को दुर्घटना से जोड़ते हुए अपराध दर्ज किया है।
परिवार का आरोप बनाम घटनास्थल के साक्ष्य
मृतक के परिवार की ओर से आरोपी वाहन बताए जाने और घटनास्थल पर दूसरे वाहन के नहीं मिलने की बातों के बीच अब पुलिस की विवेचना बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या पुलिस ने घटनास्थल के फोटोग्राफ, दुर्घटना के निशान, पेड़ पर टक्कर के निशान, दोनों वाहनों की क्षति, CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया है?
क्या 112 टीम द्वारा घटनास्थल पर पहुंचने के समय की स्थिति को केस डायरी में दर्ज किया गया है?
और सबसे अहम सवाल—
अगर घटनास्थल पर दूसरी बाइक नहीं मिली थी, तो CG10BF8922 को दुर्घटना से जोड़ने का आधार क्या है?
अब पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें
FIR में स्वयं पुलिस ने लिखा है कि मामला मर्ग क्रमांक 36/26 की जांच, गवाहों के कथन, घटनास्थल निरीक्षण और पंचायतनामा के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया।
ऐसे में अब आवश्यकता है कि पुलिस पूरे मामले की जांच किसी व्यक्ति के आरोप के आधार पर नहीं, बल्कि घटनास्थल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर करे।
हादसा पेड़ से टक्कर का था या वास्तव में पीछे से किसी बाइक की टक्कर हुई थी—इसका फैसला आरोपों से नहीं, घटनास्थल के साक्ष्य और निष्पक्ष जांच से होना चाहिए।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि FIR में किसे आरोपी बनाया गया है, सवाल यह है कि पुलिस के पास उस आरोप को साबित करने के लिए ठोस सबूत क्या हैं?
हाल ए हलचल न्यूज की नजर इस मामले की आगे होने वाली पुलिस जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों पर बनी रहेगी।