विजयराघवगढ़ में खनन माफिया पर दो बड़ी कार्रवाइयों से उजागर हुआ अवैध उत्खनन का सिंडिकेट , जांच में बड़े नामों की आहट, बंद खदानों में चल रहा था संगठित अवैध खनन खिरवा में पोकलेन जब्त, जमुआनी कला में ऑपरेटर फरार,5 साल से जारी खेल पर पहली बड़ी कार्रवाई
विजयराघवगढ़ में खनन माफिया पर दो बड़ी कार्रवाइयों से उजागर हुआ अवैध उत्खनन का सिंडिकेट , जांच में बड़े नामों की आहट,
बंद खदानों में चल रहा था संगठित अवैध खनन
खिरवा में पोकलेन जब्त, जमुआनी कला में ऑपरेटर फरार,5 साल से जारी खेल पर पहली बड़ी कार्रवाई
कटनी।। जिले में लंबे समय से पनप रहे अवैध उत्खनन के गोरखधंधे पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रहार किया है। विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम खिरवा और जमुआनी कला में की गई ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि अब खनन माफियाओं के लिए जिले में काम करना आसान नहीं रहेगा। यह कार्रवाई केवल मशीन जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए उस संगठित नेटवर्क को बेनकाब करने की कोशिश है, जो वर्षों से नियमों को ठेंगा दिखाकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा था।
कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने ग्राम खिरवा में छापा मारकर बड़ी कार्रवाई की। यहां एक लैप्स हो चुकी चूना खदान में बिना किसी वैध अनुमति के पत्थर और मलबे का उत्खनन किया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि चेन माउंटेन पोकलेन मशीन निर्धारित खदान सीमा से बाहर जाकर खुदाई कर रही थी, जो स्पष्ट रूप से खनिज नियमों का उल्लंघन है। टीम ने मौके पर पहुंचकर मशीन को जब्त किया और संबंधित भूमि स्वामी व वाहन मालिक के बयान दर्ज किए। जब्त मशीन को कैमोर थाने की अभिरक्षा में रखा गया है तथा संबंधितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

जमुआनी कला में देर रात दबिश, संगठित गिरोह के संकेत
इसी क्रम में ग्राम जमुआनी कला में माइनिंग विभाग की टीम ने देर रात छापा मारते हुए अवैध खनन के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। यह खदान करीब 5 वर्षों से बंद बताई जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद यहां बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन जारी था। जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, पोकलेन मशीन का ऑपरेटर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कार्रवाई की भनक मिलते ही बचने की पूरी तैयारी पहले से थी। स्थिति को नियंत्रित करते हुए विभाग ने दूसरी खदान से ऑपरेटर बुलाकर मशीन को सुरक्षित रूप से सडंरसन कंपनी परिसर में खड़ा कराया और मौके पर ही जांच एवं दस्तावेजी कार्यवाही शुरू कर दी।

जांच में खुलेंगे बड़े राज, प्रभावशाली लोगों की भूमिका संदिग्ध
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि अवैध उत्खनन का यह खेल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित और प्रभावशाली नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच के दौरान प्रस्तावित विस्तृत निरीक्षण में खसरा नंबर, उत्खनन की वास्तविक मात्रा और इसमें शामिल व्यक्तियों की जानकारी जुटाई गईं । सूत्रों की मानें तो जांच में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे इस पूरे प्रकरण में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।
सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा और खनिज निरीक्षक कमलकांत परस्ते के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब अवैध उत्खनन के खिलाफ सख्त रुख अपना चुका है। अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और नियमों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पर सवाल अब भी वही अब तक क्यों नहीं हुई कार्रवाई हालांकि इस कार्रवाई ने प्रशासन की सक्रियता को दर्शाया है, लेकिन इससे कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। आखिर 5 वर्षों से बंद खदान में अवैध उत्खनन का यह खेल कैसे चलता रहा क्या स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार तंत्र इससे अनजान था या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।

इन कार्रवाइयों में स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा, जिनकी शिकायतों और सूचनाओं के आधार पर प्रशासन ने सटीक कार्रवाई की। विजयराघवगढ़ क्षेत्र में हुई यह दोहरी कार्रवाई केवल एक शुरुआत है। असल चुनौती अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की है। यदि प्रशासन अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम रहता है और जांच को निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से अंजाम देता है, तो यह अभियान जिले में एक मिसाल बन सकता है। लेकिन यदि यह कार्रवाई भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई, तो खनन माफियाओं का हौसला और बढ़ेगा। क्या यह सख्ती स्थायी बदलाव लाएगी, या फिर समय के साथ यह भी एक और अधूरी कहानी बनकर रह जाएगी। यदि इस बार भी कार्रवाई केवल मशीन जब्ती और कागजी कार्यवाही तक सीमित रही, तो यह अभियान भी अन्य अभियानों की तरह महज दिखावा बनकर रह जाएगा।