एक सवाल और बदल गया पूरा माहौल दौरा सरकारी था, लेकिन कहानी इंसानियत की बन गई जब कलेक्टर नहीं, बेटे के रूप में नजर आए आशीष तिवारी,अम्मा-दादा का हाथ थामकर खुद डॉक्टर तक ले गए, जिस उम्र में बेटों का सहारा चाहिए, वहां कलेक्टर ने निभाया बेटे का फर्ज
एक सवाल और बदल गया पूरा माहौल दौरा सरकारी था, लेकिन कहानी इंसानियत की बन गई जब कलेक्टर नहीं, बेटे...